Sunday, October 23, 2011

दीपावली......!!


कहते है
दीवाली आती है
लक्ष्मी भी साथ लाती है !
सच तो यह है कि
लाती नहीं, ले जाती है !
यह नहीं कहता कि
दीवाली न मनाओ !
लेकिन व्यर्थ ही में
मुद्रा यूँ न गवाओं !
उन्हीं का कर योग
तुम करो विनियोग
कुछ करों क्रय
बनो सक्रिय
ताकि कह सको कि
यह दीपावली की भेंट है !
वरना, तुम्हारा तो
बस मटियामेट है .....!!

Saturday, October 1, 2011

चेहरा...............!!












रहता हूँ खड़ा जब भी
मै आईने क़े सामने
दिखता रहता है, एक चेहरा
कुछ अन्जाना सा
कुछ जाना पहचाना सा !!
सोचता हूँ, क्या यहीं है वो
करता रहता हूँ, जिसके लिए
हर गुनाह मै बारम्बार !
और करता रहूँगा लगातार !!
 कौंधती है, बिजली-सी
ना जाने क्यों ये चेहरा
नया सा  लागे हर बार !!
क्यों बदल जाये केवल
मेरा ही अपना चेहरा
करता हूँ गुनाह जिन चेहरों क़े लिए
नहीं बदलते सिर्फ वही चेहरे......!!

Sunday, September 25, 2011

क्यों मै सोचूँ,...?

क्यों मै सोचूँ, वह नहीं है मेरा अपना !
अपना सपना भी होता है केवल अपना !!
जो भी है, जितने भी है, सब मेरे अपने है !
कुछ हकीकत में है, बाकी मेरे सपने में है !!
परवाह नहीं गर, भटकता रहे मेरा  तन !
नियंत्रण में तो रहता है हमेशा मेरा मन !!
चाह नहीं मुझे कि कोई कहें मुझे अपना प्यारा !
मै तो मन ही मन ना जाने कब-कब क्या हारा !!
 

Sunday, July 17, 2011

ख्वाबों का पेड़

बहुत  मशहूर  हुए  हम
तुम्हारे  नाम  क़े  कारण !
आज तुम्ही ने मुख मोड़ा
क्यों कर लिया मौन धारण !!

ख्वाबों का पेड़ मुरझा गया
वीरान  हो  गई हर  डाली !
बीते हुए अतीत की आखिर
कब तक करू मै रखवाली !!

वेदनाओं का पिटारा अब
मेरा अपना मीत बन गया !
सो नैया को मैंने स्वयं ही
तूफान की ओर मोड़ दिया !!

तन्हाई में, पवन में
मेरा दर्द है  लहराता !
मै तो बस अन्दर ही
घुट  कर  रह  जाता !!

अम्बर को  या  धरती को

किसे अपनी व्यथा सुनाये !
जब  तार ही  टूट  गया
मोती हम कैसे पिरोये !!

Saturday, July 2, 2011

दायरा समय का.....!!

समझाया करती थी माँ बचपन में लाख !
बेटा, वक़्त रहते  बना ले तू अपनी साख !!

पर,कही हुई बातें सिर पर से गुजर जाती !
काश, वो बातें तब ही समझ में आ पाती !!

बनकर बाप, आज जब बच्चे को समझाता ! 
बार-बार माँ का ही चेहरा सामने आ जाता !!

काश, माँ तेरी कही बातें वक़्त रहते समझ जाता !
आज फिर क्यों इस तरह अपने दिल को तडफाता !!

जिसकी गुजरनी थी जैसी, उसकी तो वैसी गुजर गई !
सोच लो मेरे भैय्या, तुम्हारी है अभी बारी नई-नई !!

Sunday, May 8, 2011

भूल जा ........!!


जानती हूँ मै,
मानती हूँ मै ,
तू भी आज तड़पता होगा !
हर दिन से ज्यादा,
आज और कलपता होगा !!
देता होगा मुझे तू.. सौ सौ गालियाँ,
औरो की तरह ही कोसता होगा !!

बरसो मैंने भी छानी है खाक,
हर कचरे क़े ढेर में...
दिखाई देते थे केवल अपने ही पाप
दिखता केवल तुम्हारा ही चेहरा
लेकिन क्या मै पापिन थी,
कौन कर पाया आज तक
फैसला किसी क़े भी हक़ में  !
दुनिया का क्या है,
वह तो कहती रहती है,
कुछ होने पर \
कुछ न होने पर भी !!

देना चाहती थी,
प्यार-दुलार मै भी
बन कर एक सम्पूर्ण माँ ...
नियति ही शायद ख़राब थी
या फिर दोष केवल मेरी किस्मत का !!

(मातृ दिवस क़े अवसर पर एक माँ का निवेदन .....!)

Saturday, May 7, 2011

लो आ गई उनकी याद .....!!

बात है यह कम से कम कोई तीस वर्ष पुरानी !
हकीकत बन गई है आज, केवल एक कहानी !!

पहले रातो को मद-मस्त होकर जब  घर आता !
सब अपना लगता, डर नहीं था बिलकुल समाता !!

माँ खोलती दरवाजा आहिस्ते - आहिस्ते !
जाग ना जाये कही पिताजी क़े फरिस्ते !!

माँ ने नहीं कहा कभी भी हमसे एक भी बात !
दिनचर्या चलती रहती ठीक, दिन हो या रात !!

हम समझते रहे ख़ुद को बहुत ही  होशियार और लायक !
माँ ने भी आज तक कभी नहीं पुकारा कह कर नालायक !!

विवाहोपरांत जब पहली बार हुए हम फिर मद-मस्त !
पत्नी ने कर दिए हमारे सारे हौसले बुरी तरह से पस्त  !!

तब जाकर समझ में आया, माँ केवल माँ होती है !
रोते तो सब है दुनिया में, दिल से केवल  माँ रोती है !!