Saturday, October 1, 2011

चेहरा...............!!












रहता हूँ खड़ा जब भी
मै आईने क़े सामने
दिखता रहता है, एक चेहरा
कुछ अन्जाना सा
कुछ जाना पहचाना सा !!
सोचता हूँ, क्या यहीं है वो
करता रहता हूँ, जिसके लिए
हर गुनाह मै बारम्बार !
और करता रहूँगा लगातार !!
 कौंधती है, बिजली-सी
ना जाने क्यों ये चेहरा
नया सा  लागे हर बार !!
क्यों बदल जाये केवल
मेरा ही अपना चेहरा
करता हूँ गुनाह जिन चेहरों क़े लिए
नहीं बदलते सिर्फ वही चेहरे......!!

8 comments:

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति सर,
    सादर...

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  2. कल 04/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. गहन भाव युक्त चिंतन ..बेहद सार्थक प्रस्तुति ...सादर !!!

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  4. गहरी अभिव्यक्ति ..

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  5. बहुत बढ़िया लिखा है आपने! और शानदार प्रस्तुती!
    मैं आपके ब्लॉग पे देरी से आने की वजह से माफ़ी चाहूँगा मैं वैष्णोदेवी और सालासर हनुमान के दर्शन को गया हुआ था और आप से मैं आशा करता हु की आप मेरे ब्लॉग पे आके मुझे आपने विचारो से अवगत करवाएंगे और मेरे ब्लॉग के मेम्बर बनकर मुझे अनुग्रहित करे
    आपको एवं आपके परिवार को क्रवाचोथ की हार्दिक शुभकामनायें!
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

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  6. आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया !!
    आपकी राय हमारे लिए अमूल्य है !
    इसी तरह प्रेम-भाव बनाये रखे ............!!

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  7. chehrey per ki gayee abhivyakti .......... adbhuth !!!

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