Sunday, February 10, 2013

जो है, सो है.........!!



जो है, मेरे जेहन में !
वही है, मेरे लेखन में !!

अच्छे बुरे की पहचान नहीं !
सच्चे झूठे का भी ज्ञान नहीं !!

छुपा नहीं पाता, दिल में आई बात को !
झुठलाता मै नहीं कभी, दिन और रात को !!

किसी के कहने से दिन को रात कहता नहीं !
अपनी बात कहने से फिर कभी मै डरता नहीं !!

कहूँगा हमेशा मै वही, जो मुझे कहना है !
नहीं किसी के डर से, मुझे चुप रहना है !!

लगे भले किसी को अच्छी या फिर बुरी !
कहूँगा लेकिन फिर भी, बात पूरी खरी !!

ले जाएँगा भला कौन किसी को, कहाँ से कहाँ !
जाना तो है छोड़ अंत दिन, अपना ये भी जहाँ !!

Tuesday, January 8, 2013

कासे कहूँ.....!!


देखता  हूँ 
रातों में 
जब तारों को !
सोचता हूँ 
तुम भी तो 
देखती होगी 
इन्ही तारों को !!

मिलन करती होगी 
मेरी और तुम्हारी दृष्टी 
उन तारों पर !
और, सुनाती होगी 
एक दूसरे को अपना 
मूक सन्देश !!

कितने भाग्यवान है,
ये तारे भी 
जो देख पाते है 
तुम्हें भी और 
मुझे भी !   
पर  कैसे अभागे 
है, हम दोनों 
जो नहीं देख पाते 
केवल, एक-दूसरे को !!      

Sunday, September 23, 2012

कैसी ये दुनियादारी.........?


गर , चाहते   हो  तुम भी गुजारना हसीं  बुढ़ापा ! 
छोड़ो दुनियादारी, मत खोयो कभी अपना  आपा !!

ना देना भूले से भी किसी को उपदेश 
और ना ही देना , बिन माँगी सलाह !
रहो अपने ही घर में, बन कर मेहमान, 
चुन ही लेंगे सब अपनी-अपनी राह !!

नहीं मानता जब कोई, तेरी बात !
क्यों बैठे सोचा करता,यूँ पूरी रात !!
भले, आज लगती हो तेरी बातें उनको बकवास !
सुनने में भी नहीं आती वो, किसी को कुछ रास !!
अनुभवों क़े बोल वैसे भी पहले लगते ही है, कडवे !
पड़ती है जब एक बार, हसीं लगते तब अपने दड्बें !!
वक़्त क़े साथ-साथ वो भी, कभी तो सुधर जायेंगे !
आयेंगे लौट कर यहीं, वरना फिर किधर जायेंगे !!

Friday, May 11, 2012

सच ही तो है.............!!


गर, करनी हो साठ साल तक ऐश
तो जीवन के छह साल मेहनत करना सीख !
वरना, छह साल तक कर ले बस ऐश
और माँगता रह, फिर साठ साल तक भीख !!

याद आती है आज फिर तन्हाइयों में,
कही हुई बड़ों की वो वक्ती कड़वी बातें !
सुनते ही जिन्हें, उस वक्त पर
खौल उठती थी शरीर की सभी आंतें !!

जल-सा जाता था, शरीर का एक-एक रोआं
लगता था, कहीं ये दुश्मन तो नहीं हमारे !
मान जाते गर समय रहते बात उनकी
तो आज हो जाते हमारे भी वारे-न्यारे !!

जीवन के कुछ वर्षों का अपना ही महत्त्व होता है !
जिसने उन्हें खो दिया वह तो जीवन भर रोता है !!

Monday, March 26, 2012

ये आदत.......!!


जब भी डालनी चाही आदत,
किसी अच्छी नई आदत की !
बार-बार रास्ता रोका
उन्ही पुरानी आदतों ने !

घबराकर सोचा,
कितना बदनसीब हूँ मै
खिलौना बन गया हूँ,
मै अपनी आदतों का !
नहीं कर पाया
एक अच्छी आदत का
बीजारोपण !

किन्तु, सोचना ऐसा
थी केवल मेरी एक भूल !
वो आदतें, जो हो गई
आज इतनी मजबूत
जड़ें नहीं जमाई उन्होंने
केवल एक ही दिन में !
उन्होंने भी कभी,
संघर्ष किया होगा जमकर
तब जाकर हो पाई वो
आज इतनी प्रबल !

राह ताक रही आज
वैसे ही संघर्ष की
ये बेचारी नई आदत !
जमायेंगी अपनी जड़ें ये भी
कर के पुरानी आदतों से
एक लंबी बगावत !! 

Saturday, March 24, 2012

नसीब ऐ-गम.....!!


रहती हो भले, रात अँधेरी
मेरे नसीब की तरह
टिमटिमाते रहते है फिर भी
आसमान पर इक्के-दुक्के सितारे !
आंसुओ से मेरे, 
भला क्या मुकाबला उनका
झिलमिलाते ही रहते है सदा
आंसुओं में मेरे अनगिनत सितारें !!

सुबह से ही आज जा रहा
क्यों डूबा मेरा ये दिल
ना धडका था कभी यूँ
रह रहकर तो मेरा दिल !
जाने ऐसी क्या बात थी
उस नन्हें-मुन्ने चिराग में
टूटते ही उसके आज फिर
टुकड़े-टुकड़े हो गया
मेरा ये अपना दिल !!

संभाल-संभालकर रखा था
मैंने उस चिराग को
कितने जतन, कितने बरसों से
लगता था कुछ ऐसा, कि
मेरी जिंदगी से है उसका गहरा नाता
टूटेगा वह तो टूट कर रह जाऊंगा
और आज,
आज तो मेरा सब कुछ
रह गया टूट कर !!

Sunday, March 18, 2012

क्या भूल सकते हो कभी....??


क्या भूल सकते हो कभी
बिन निगाहों वाले बाबा की,
सब कुछ देखती हुई वो निगाहें !
याद तो आज भी होगी,
आंगन में अमरस का गिलास देती
बड़ी-अम्मा की वो प्यार भरी बाहें !!

सुबह-सबेरे प्रतिदिन
औरों के बागों से आम चुराना !
कैथा वाली बुआ की बाग पर
केवल अपना ही हक जमाना !!
पानी भरने के लिए बाबा का
कुए की जगत से हांक लगाना !
और तुम्हारा लोटिया लेकर,
फिर खेत की और निकल जाना !!
क्या भूल सकते हो कभी उसको,
खेत में घुस कर आलू खिलाना !
पता लगते ही गांव में बुआ का,
हम सब पर जोर-जोर से चिल्लाना !!

सच तो यह है, कि
आज भी हम कुछ नहीं भूले !
वक्त के साथ-साथ केवल,
अपने परिवारों में ही है घुले !!
क्या अपनों को कभी कोई,
यूँ ही कभी भूल पाता है !
वक्त पड़ने पर तो अपना ही
केवल दौड़ा चला आता है !!